Sunday, June 21, 2020

Hindi poem - Antim patra /अंतिम पत्र

Hindi poem - Antim patra / अंतिम पत्र 
Hindi poem antim patra


अंतिम पत्र 

छाँव मिला नहीं किसी छत्र में 
दो शब्द छूट गया अंतिम पत्र में 

मुजरिम उसका 
अकेलापन था 
घूट - घूट कर  जिया 
वो हर क्षण था 
चेहरे की रौनक दिखी 
होंटो की मुस्कान दिखी 
पर न दिखा 
जो उसका 
खाली मन था 
घूट - घूट कर जिया 
वो हर क्षण था 

मन घूटता है उसके हिज्र में 
दो शब्द छूट गया अंतिम पत्र में..!! 






Subodh Rajak 
SUBODH HINDI COMPOSITIONS 

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धन्यवाद!! 

4 comments:

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